राजमा की खेती: स्वाद और स्वास्थ्य का खजाना

राजमा, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर एक दाल, जिसकी खेती भारत में बड़े पैमाने पर होती है।

कई तरह की राजमा किस्में मौजूद हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना विशिष्ट स्वाद और रंग होता है।

ठंडी जलवायु और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी राजमा की खेती के लिए आदर्श हैं।

बुवाई का समय क्षेत्र के अनुसार बदलता है, लेकिन आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच होता है।

नियमित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और रोग-कीट प्रबंधन राजमा की फसल के लिए आवश्यक हैं।

फसल पकने पर कटाई की जाती है और सूखने के बाद भंडारण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है।

राजमा पोषण का एक बढ़िया स्रोत है और इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

राजमा की खेती किसानों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत हो सकती है और साथ ही साथ पौष्टिक भोजन का उत्पादन भी करती है।