इस विधि में, डेल्टा हल से 90 सेमी की बीचक में 7-10 सेमी की बीचक पर बोल्ट लगाने का प्रयास किया जाता है। 

इस विधि का उद्देश्य विशेषकर उन किसानों के लिए है जो ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां स्थानीय मिट्टी की स्थिति सामान्य है। 

सींच, क्रेन और साधारित श्रम साधनों की उपलब्धता के क्षेत्र में इस विधि को लागू करना उपयुक्त है। 

बोल्ट लगाने के बाद, इस पर भारी परत लगाई जानी चाहिए। 

यह तकनीक विशेष रूप से स्थानीय मिट्टी की विशेषताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। 

किसानों को सरलता से इस तकनीक का अध्ययन करने और अपनाने का मौका मिल रहा है। 

इस विधि का अनुसरण करने से किसानों को बोल्ट लगाने में सहायता मिलती है, जिससे काम को अधिक सुगम बनाया जा सकता है। 

स्थानीय साधारित सामग्री का प्रयोग करके खेती में लागत को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। 

इस तकनीक से सीधे प्रतिकृया प्राप्त करने की क्षमता मिलती है, जिससे किसान समय प्रबंधन कर सकता है। 

अधिकतम उत्पादकता और खेती की बेहतर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस विधि का प्रयोग किया जा रहा है।