तरबूज की खेती कब और कैसे करें की सम्पूर्ण जानकारी। 

नमस्कार किसान भाइयों स्वागत है। आपका एक बार फिर से हमारे वेबसाइट किसान के बारे में। तरबूज की खेती का सही समय आने आनेवाले है। कुछ किसान भाई अगेती में तरबूज की फसल लगाएगी तो कुछ किसान सही समय पर तरबूज की फसल लगाएगी और कुछ किसान पछेती में तरबूज की खेती करेंगे।

इन तीनों ही तरह के किसान भाइयों का उद्देश्य एक ही कि तरबूज की फसल से हमें ज्यादा से ज्यादा आमदनी मिले। इसलिए अगर आप भी तरबूज की खेती करना चाहते और आप जानना चाहते कि तरबूज की फसल से कितनी आमदनी होगी तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े। क्योंकि इस लेख में हम एक एकड तरबूज की खेती का संपूर्ण विश्लेषण इन पांच के आधार पर करेंगे। 

नंबर वन मिट्टी और समय, नंबर टू लागत, नंबर थ्री उत्पादन नंबर फोर आमदनी, नंबर फाइव प्रॉफिट कितना हुआ और प्रॉफिट परसेंटेज क्या रहा। इसके साथ ही लेख के अंत में जानेंगे कि तरबूज की फसल के साथ हम किन किन फसलों की इन्टरक्रोप्पिंग कर सकते हैं। 

तो बिना समय नष्ट किए आते हमारे पहले पॉइंट मिटटी और समय पर। तरबूज की खेती के लिए उनसे मिट्टी, सर्वोत्तम है और तरबूज के बीजों की बुवाई का सही समय क्या है। यह जानने से पहले अगर आपने अभी तक इस ब्लॉग को सब्सक्राइब नहीं किया है तो इसे सब्सक्राइब करें। 

हम इस ब्लॉग को 1500 सब्सक्राइब का टारगेट लेकर चलते हैं तो फटाफट से सब्सक्राइब कर के टारगेट को पूरा  करें और अगर आप हमारे ब्लॉग पर पहली बार आये हैं तो इसे जरूर से सब्सक्राइब करें।

तरबूज की खेती का सही समय क्या है?

तरबूज की खेती हर तरह की मिट्टी में कर सकते। सिर्फ आपकी खेत की मिट्टी में सारे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होने चाहिए। बात करें अगर मिट्टी के पीएच मान की तो मिट्टी का पीएच मान, 6.5 सिक्स पॉइंट फाइव से सेवन के बीच में होना चाहिए। 

अगेती में तरबूज के बीजों की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय दिसंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 30 जनवरी तक के समय में कर सकते हैं। फरवरी का महीना तरबूज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है। व पछेती में आप तरबूज के बीजों की बुवाई मार्च के महीने में कर सकते हैं। 

एक एकड़ तरबूज की खेती में कितनी लागत आती है?

मिट्टी और सही समय जानने के बाद आते हैं हमारे दूसरे पौध लागत पर। एक एकड़ तरबूज की खेती में कितनी लागत आती है? एक एकड़ तरबूज की खेती में बीज की मात्रा लगभग 300 से 350 ग्राम। व सागर सीड के 50 ग्राम का पैकेट ₹1,300 में आता है। हमें कुल सात पैकेट लगेगे। इस तरह एक एकड़ तरबूज की खेती में हमारा बीज का खर्च आएगा 9100 रुपये। 

खेत की तैयारी का खर्चा आएगा का 4,000 रुपया। बेदमेकर का खर्च आएगा 800 रुपया। व 20 माइक्रोन मल्चिंग पेपर की हमारी लागत आएगी12,000 रुपया। मल्चिंग पेपर में आने वाला यह खर्च आपको अभी फालतू लग रहा होगा, लेकिन इसके कई सारे फायदे देखने को मिलते हैं। जैसे हमारा उत्पादन बढ़ता है, क्योंकि मल्चिंग पेपर के कारण पेड़ के ऊपर खरपतवार नहीं उगते हैं। 

जिस कारण पौधे सीधे ही खाद को ग्रहण करते और हमारा इनडाइरेक्टली उत्पादन बढ़ता है। साथ ही हमारा निंदाई गुड़ाई का खर्च भी नहीं आता है। इसलिए हमारी लागत भी बचती है। और इसके साथ हमारे फ़ूड की क्वालिटी भी इनक्रीस होती है। इस कारण मल्चिंग पेपर में आने वाली आपकी यह लागत पूरी तरह से वसूल हो जाती है। 

व आप बिना मल्चिंग और की सहायता से भी तरबूज की खेती कर सकते है पर उसमें आपको उत्पादन कम देखने को मिलेगा। बेसल डोस का हमारा खर्चा ₹2,190, ड्रेंचिंग की हमारी लागत आएगी ₹1,902 तरबूज की फसल अच्छे विकास के लिए हम वाटरसॉल्युबल फ़र्टिलाइज़र का खर्च इस्तेमाल करेंगे और तरबूज की फसल अच्छा उत्पादन लेने के लिए हम प्लांट ग्रोथ पावडर का भी उपयोग करते। इन दोनों की हमारी खर्च आएगा 6500 रूपये। 

तरबूज की फसल में फंगस जनित रोगों का अटैक भी देखने को मिलता है। हम पंकज जनित रोगों के लिए फंगी साइड का स्प्रे करते है। फंगी साइड का स्प्रे करने की हमारी लागत आएगी 1162 रूपये। फंगस जनित रोगों के अलावा तरबूज की फसल में कई सारे रोग व कीटों का भी अटैक देखने को मिलता है।

इन कीट व् रोग को कंट्रोल करने के लिए हम इसमें करते हमारे इस स्प्रे का खर्च जाएगा 2377 रूपये। हार्वेस्टिंग के लिए हमें लेबर की जरूरत लगेगी जिसका हमारा खर्चा आएगा 6000 रुपया। खेत से मंडी तक का ट्रांसपोर्ट चार्ज आएगा 8000 रूपये। खेत से मंडी तक का आने वाला या ट्रांसपोर्ट का खर्च। 

हर किसान भाई का अलग अलग हो सकता है क्योंकि यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि आपके खेत से मंडी की दूरी कितनी है। इन सब खर्च को जोड़ कर एक एकड तरबूज की फसल हमारी लागत आएगी। 54 हज़ार 300 रूपये।

एक एकड़ तरबूज की खेती से कितना उत्पांद होता है?

मिट्टी समय व लागत के बाद आते है हमारे तीसरे पॉइंट उत्पादन पर। एक एक तरबूज की खेती से कितना उत्पादन होगा। अगर आपने तरबूज के बीजों की बुवाई बेड बनाकर ड्रिप व् मल्चिंग की सहायता से कीये और आपकी तरबूज की फसल रोग व् किट मुक्त है। 

और आपने सही समय पर खाद व उर्वरक उचित मात्रा में अपनी तरबूज की फसल को बोया है। तो एक एकड़ तरबूज की खेती से ढाई 100 कुंतल से लेकर 300 कुंतल तक उत्पादन हमें देखने को मिलता है। हम 250 क्विंटल तक उत्पादन लेते हैं। 

यानि कि एक एक खरबूज की खेती से हमारा उत्पादन हुआ 250 क्विंटल। तरबूज की फसल अच्छा उत्पादन लेने के लिए आप तरबूज के उन्नत किस्म के ही बीजों का चुनाव करें। तरबूज के तीन उन्नत किस्म के बीज इस प्रकार है –  पहले नंबर पर सागर सीड्स की सागर किंग की वेराइटी आती है। दूसरे नंबर पर सीजनता कंपनी सुपर सोबर वेराइटी आती और तीसरे नंबर पर वो है कंपनी मैक्स वेराइटी आती। आप इन तीनों तरह के सीड्स में से आपके एरिया के लिए जिस भी सीड्स का अच्छा मार्केट है  उसका चुनाव कर सकते हैं। 

एक एकड़ तरबूज की खेती से कितनी आमदनी होती है?

मिट्टी, समय, लागत, उत्पादन के बाद आते है हमारे पाँचमे पॉइंट्स आमदनी पर। एक एकड़ तरबूज की खेती से कितनी आमदनी होती है। अगेती व पछेती में लगाई गई तरबूज की फसल का ज्यादातर किसान भाईयों अच्छा मंडी थोक भाव मिलता है। मार्च व अप्रैल के महीने में किसान भाइयों को तरबूज की फसल का मंडी थोक भाव ₹10 से लेकर ₹12 किलो के आसपास मिलता है। 

व अप्रैल और मई में किसान भाईयों को तरबूज का मंडी थोक भाव ₹5 और ₹7 के आसपास देखने को मिलता है। इसलिए हम इन तीनों महीनों का एवरेज ₹6 लेते हैं। हमारा उत्पादन हुआ था 250 क्विंटल। और एक क्विंटल में 100 किलो होता है। और हमने एक किलो का मंडी थोक भाव लिया था 6 रुपया। इस तरह हमारी आमदनी हुई ₹1,50,000 यानी कि एक एकड़ तरबूज की खेती से हमारी आमदनी हुई ₹1,50,000

एक एकड़ तरबूज की खेती से कितना प्रॉफिट होता है?

मिटटी, समय, लागत, उत्पाद व आमदनी के बाद आते है हमारे पाँचमे पॉइंट्स पर प्रॉफिट परसेंटेज कितना हुआ। प्रोफिट निकालने के लिए हम सिंपल कुल आमदनी में से लागत को घटा देंगे तो जो आकड़ा हमें मिलेगा वह हमारा प्रॉफिट होगा। हमारी आमदनी हुई थी। ₹1,50,000 रूपये व् लागत आयी 54 हज़ार 30 रूपये। इस तरह हमारा प्रॉफिट हुआ 95,970 रूपये और प्रॉफिट परसेंटेज रहा 177%

तरबूज की फसल के साथ किन फसलों का इन्टरक्रोप्पिंग कर सकते हैं?

अब इस लेख के अंत में बात करते हैं कि तरबूज की फसल के साथ हम किन किन फसलों की इंटरक्रॉपिंग कर सकते है। आप तरबूज की फसल के साथ फ्रीज कर इंटरक्रॉपिंग में ले सकते। श्री सिस्टर इंटरक्रॉपिंग मेथड ले सकते हैं। थ्री सिस्टर इन्टरक्रोप्पिंग मेथड में हमारी पहली फसल रहती है मक्का, दूसरी बीन्स और तीसरी हमारी कोई भी कददू वर्गीय फसल रहती है। 

और तरबूज की फसल कददू वर्गीय फसल में ही आती है। इसके अलावा आप बागवानी वाली फसलों के साथ भी तरबूज की इंटरक्रॉपिंग कर सकते हैं। बागवानी वाली फसलें जैसे अमरूद, केला, पपीता और भी अन्य बागवानी वाली फसलों के साथ आप तरबूज के इन्टरक्रोप्पिंग कर सकते हैं।

बागवानी वाली फसलों में दो लाइन के बीच में काफी जगह खाली पड़ी रहती है तो आप इस खाली पड़ी जगह पर तरबूज की फसल की एक लाइन ले सकते है या फिर आप दो पौधों के बीच में तरबूज के बीजों की बुवाई कर सकते है। इस तरह से आप बागवानी वाली फसलों के साथ में तरबूज की इंटेरसोप्पिंग कर सकते हैं। 

इस लेख में में दी गई जानकारी अगर अच्छी लगे तो इस लेख को सब्सक्राइब और शेयर करें। हमने इस लेख पर 1500 व्यू का टारगेट रखा है तो फटाफट से लाइक करके टारगेट को कंप्लीट करें। और अगर आप इस लेख के माध्यम से थोड़ी भी मदद हुई तो इस वेबसाइट को सब्सक्राइब अवश्य करें। धन्यवाद किसान भाइयों, जय जवान जय।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *