
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का क्या लाभ है?: हाल ही में फार्मास्यूटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया यानी पीएम बीआई के अध्यक्ष ने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत जनऔषधि केंद्रों में गैस्ट्रिक, मधुमेह, हृदय संबंधी बीमारियों और दर्द निवारक दवाओं की बिक्री में 170 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। पीएम बीआई के अध्यक्ष के अनुसार जनऔषधि केंद्रों से जेनरिक दवाएं खरीदकर नागरिकों ने पिछले नौ वर्षों में लगभग 20,000 करोड़ से ज्यादा की बचत की है। जनऔषधि केंद्रों पर बेची जाने वाली जेनरिक दवाएं अपने ब्रांडेड समकक्ष दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं।
भारत में जनऔषधि केंद्र कितने है?
आपको बता दें कि जेनरिक दवाओं में ब्रांडेड दवाओं के समान ही सक्रिय संघटक और सॉल्ट होते हैं। ये दवाएं गुणवत्ता और प्रभावकारिता में ब्रांडेड दवाओं के समान ही होती हैं। वर्तमान में देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना के तहत कुल 9484 जनऔषधि केंद्र सरकार की यह योजना है कि इन्हें बढ़ाकर 10 हज़ार करना है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के अंतर्गत फिलहाल 1800 दवाएं और 285 सर्जिकल वस्तुएं मिलती है। इस योजना के तहत वर्तमान में चार गोदाम हैं, जो गुरुग्राम, चेन्नई, गुवाहाटी और सूरत में स्थित हैं। इनमें गुरुग्राम स्थित केंद्रीय जन औषधि गोदाम सबसे बड़ा है।
आपको ज्ञात होना चाहिए कि भारतीय सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा जेनरिक दवाओं को सभी के लिए किफायती बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2008 में जन औषधि योजना शुरू की गई थी। इस योजना को सितंबर 2015 में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के नाम से नया रूप दिया गया था। नवंबर 2016 में इस योजना को और गति देने के लिए इसे फिर से नया नाम प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना दिया गया। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराकर भारत के प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य देखभाल बजट को कम करना है।