क्या पेटीएम की नोटबंदी हो गई है क्या

क्या पेटीएम की नोटबंदी हो गई है क्या : क्या पेटीएम पेमेंट्स बैंक की नोटबंदी हो गई? ज्यादा कह दिया या ऐसा ही कुछ हुआ है? पेटीएम की सहायक कंपनी की नोटबंदी हो गई। नोटबंदी के समय ही पेटीएम का विस्तार हुआ और यह कंपनी चर्चा में आई। मगर Reserve Bank के आदेश के बाद उस पर तरह तरह की हदबंदी लग चुकी है। जिस नोडल एकाउंट से हर तरह की लेन देन हुआ करती है,

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पेटीएम बैंक के वॉलेट की संख्या 300 मिलियन बताई जाती है

उसे 29 फरवरी के बाद अगर बंद कर दिया जाएगा तो बचेगा क्या? पेटीएम बैंक के वॉलेट की संख्या 300 मिलियन बताई जाती है। इसके खातेदारों की संख्या 3 करोड़ से अधिक है। एक महीने में 1.6 अरब लेनदेन का रिकॉर्ड है। एक झटके में सब बंद। लाइव मिंट में बाजार के एक जानकार ने कहा है, Reserve Bank के आदेश देखने से लगता है। Paytm Payments Bank का ऑपरेशन अब बंद। आज मार्केट खुलते ही पेटीएम का शेयर 20 पर्सेंट गिर गया। इतने बड़े बैंक पर डंडा नहीं, पहाड़ गिरा दिया गया है। डिजिटल बैंकिंग, Payment गेटवे इस्तेमाल करने वाले देश के करोड़ों ग्राहकों को यह फैसला समझने में अभी वक्त लगेगा।

Paytm Payments Bank नया ग्राहक नहीं बना सकेगा।

Reserve Bank के आदेश के अनुसार 29 फरवरी के बाद Paytm Payments Bank नया ग्राहक नहीं बना सकेगा। 29 फरवरी के बाद इसके ग्राहक अपने खाते में पैसा जमा नहीं कर सकेंगे, फास्टैग में पैसा नहीं डाल सकेंगे। अपने वॉलेट में टॉपअप नहीं कर पाएंगे। लेकिन आपके खाते में अभी जो भी बैलेंस है उसका इस्तेमाल कर सकेंगे। आपके खाते में ब्याज भी आएगा और आप भुगतान कर पाएंगे। पेटीएम पेमेंट्स बैंक अन्य बैंकिंग सुविधाएं भी नहीं दे सकेगा। जैसे आधार से लिंक Payment नहीं होगा। यूपीआई


सुविधाएं बंद। भारत बिल Payment ऑपरेटिंग यूनिट भी काम नहीं करेगी तो बचेगा क्या? बस उपभोक्ता अपना पैसा निकाल सकेंगे, जो अभी बचा हुआ है। इसलिए हमारा सवाल है कि क्या Paytm Payments Bank की नोटबंदी हो गई?

प्रधानमंत्री इलॉन मस्क से मिल रहे हैं।

 Vijay Shekhar Sharma इसके चेयरमैन हैं। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपने प्रगाढ़ प्रेम के प्रदर्शन में प्रफुल्लित नजर आते रहते हैं। सरकार को विजय जैसों की जरूरत नहीं थी, मगर विजय ने हमेशा ही समय समय पर सरकार के लिए विजय पताका लहराया और ट्वीट किया। सरकार की तारीफ की। प्रधानमंत्री इलॉन मस्क से मिल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं।

इससे विजय को क्या? मगर विजय ने ट्वीट किया। प्रधानमंत्री ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं। मगर Vijay Shekhar Sharma ने भी ट्वीट कर चारण गान किया। मंत्रियों के साथ अपने फोटो खिंचवा कर डालते रहे। नोटबंदी के समय विजय शेखर शर्मा का ट्वीट डंके की तरह गूंज रहा था। बज रहा था। सभी चैनलों पर चल रहा था। पता नहीं पेटीएम से विज्ञापन खाने वाले गोदी चैनल आज Vijay Shekhar Sharma का साथ देंगे या नहीं। उन्हें हीरो की तरह कंधे पर बिठाकर अपने स्टूडियो में लाएंगे या नहीं?

पेटीएम के विज्ञापन में प्रधानमंत्री का फोटो ही डाल दिया।

नोटबंदी के बाद तो उत्साहित विजय ने पेटीएम के विज्ञापन में प्रधानमंत्री का फोटो ही डाल दिया। वैसे तो रिलायंस जियो ने भी पीएम के फोटो का इस्तेमाल किया, जिसकी बहुत आलोचना हुई। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री का एक जवाब था कि दोनों कंपनियों ने माफी मांगी है, मगर इसके लिए कोई कड़ी सजा नहीं दी गई। कुछ साल बाद विजय शेखर शर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रधानमंत्री की तस्वीर ऐसे ही इस्तेमाल कर ली। माफी जैसी बात उन्होंने नहीं कही। विजय शेखर शर्मा रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री के प्रति अपने प्रगाढ़ प्रेम को गुलाब की तरह देख रहे होंगे या कांटों की तरह,

मगर हाल ही में उन्होंने ट्वीट किया कि अयोध्या से डावोस।

 मैं उनका सचिव नहीं कि बता दूं। मगर हाल ही में उन्होंने ट्वीट किया कि अयोध्या से डावोस। उनके इस संक्षिप्त ट्वीट में धर्म और अर्थ का संबंध कितना व्यापक नजर आया। मगर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के साथ दंड भी आता है। विजय शेखर शर्मा की एक कंपनी पर इतना कड़ा दंड लगा है। दो हज़ार 17 में नए साल पर कंपनी की पार्टी हो रही थी।

Vijay Shekhar Sharma कंपनी के कर्मचारियों से कह रहे थे।

उस समय Vijay Shekhar Sharma कंपनी के कर्मचारियों से कह रहे थे। अंग्रेजी और हिंदी के गालियों का समान रूप से इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि डैश, डैश, डैश यानी गालियां। जब इतिहास लिखा जाएगा ना हमारा इतिहास में नाम ज़रूर होगा। जो लोग इतिहास के छात्र नहीं हैं उन्हें एक बात बता दूं। इतिहास के पास एक बहुत बड़ा कूड़ादान भी होता है। वहां हर कोई अमर नहीं हो जाता। खुद विजय शर्मा ने इतिहास की कितनी किताबें पढ़ी होंगी, जो लोग उनका इतिहास पढ़ने जाएंगे। नए साल की पार्टी में विजय शर्मा जोश में थे।

पेटीएम से बड़ा कोई ब्रांड नहीं

कहने लगे कि आज भारत में पेटीएम से बड़ा कोई ब्रांड नहीं। दो हज़ार 17 से 2 हज़ार 24 आ गया। ब्रैंड का बैंड बज गया। पेटीएम की मातृ अथवा पितृ कंपनी वन सेवन कम्यूनिकेशंस लिमिटेड ने बयान जारी किया है कि वह अपना नया। बैंक पार्टनर खोजने जा रही है। इसका तो यही मतलब हुआ कि Paytm Payments Bank लिमिटेड की कहानी दी एंड हो गई। एक ऐसा बैंक जिसके चेयरमैन की हरकतों से लगता था कि वह सरकार का बेहद खास है।

उस बैंक के खिलाफ Reserve Bank का यह आदेश आपको हैरान कर सकता है, मगर मुझे हैरान नहीं करता है, जब पूंजीवाद पर नियंत्रण चंद लोगों का हो जाता है और नियम अपनों के लिए तय होने लग जाते हैं तो उसके भीतर भी कुछ अपनों को मिटना होता है

टेलीकॉम सेक्टर में भी तो यही हुआ।

कुछ अपनों को आगे बढ़ना होता है। टेलीकॉम सेक्टर में भी तो यही हुआ। कितना विशाल सेक्टर था, कितनी कंपनियां थी, नौकरी मिलती थी। लोग एक बड़ी कंपनी छोड़कर दूसरी कंपनी में जाते थे। तरक्की होती थी, पैसे मिलते थे। एक झटके में उस सेक्टर की कमर टूट गई। एक बड़ी कंपनी छा गई और बाकी कंपनियां झोपड़ी में समा गई। क्या वैसा कुछ फाइनेंस, टेक्निकल सेक्टर, फिनटेक सेक्टर में भी होने जा रहा है?

मार्केट में बड़ा सवाल यह उठ रहा है

पेटीएम की गर्दन मरोड़ी जा रही है या कलाई मरोड़ी जा रही है। गर्दन से मतलब है क्या? पेटीएम के वजूद को मिट जाना होगा? कलाई मरोड़ने से मेरा मतलब है क्या पेटीएम को किसी नए खिलाड़ी के लिए रास्ता देना होगा? कौन है वह नया खिलाड़ी जिसके लिए पेटीएम को रास्ता देना होगा? अपनों की अदला बदली बाजार के खुले नियमों के आधार पर नहीं होती है,

क्या पेटीएम की नोटबंदी हो गई है क्या

बल्कि बंद कमरों की दूरगामी प्लानिंग के आधार पर होती है। जनता का 90 फीसदी हिस्सा इस गेम को समझने के लायक नहीं बचा है और समझने के बाद भी अब उसके पास कुछ करने की स्थिति नहीं है। जो जानते हैं, उन्होंने तय कर लिया है कि वे हर तरह के गलत के साथ खड़े रहेंगे। तो हम सब उस भारत के प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं जिसकी गाड़ी कबकी निकल चुकी है। जिसके आने का इंतजार था, वह गाढ़ी कबकी जा चुकी है। इसीलिए घरों की बिजली महंगी है।

UPI के जरिए पेमेंट का तरीका सिखा दिया

बाजार में कहीं भी जाइए, छन से बच जाता है। पेटीएम करो। UPI लेन देन पर अभी कोई रोक नहीं, लेकिन इसी एक बड़ी कंपनी पर रोक लग रही है। यह सुनकर ग्राहक आशंकित तो होगा ही, उसके मन में बजने लगेगा। पेटीएम से डरो, पेटीएम मत करो। इसमें कोई शक नहीं कि पेटीएम ने आम लोगों को UPI के जरिए Payment का तरीका सिखा दिया और अब बाजार में व्यापक रूप से उपलब्ध है।

इसके Payment सिस्टम की सरलता के कारण बड़ी संख्या में लोग आगे आए और इससे दूसरे Payment गेटवे को भी फलने फूलने का बाजार मिला। पेटीएम के उपभोक्ता बहुत आसानी से दूसरे गेटवे की तरफ शिफ्ट होने लग जाएंगे। खुद से या इस तरह के झटके से Reserve Bank के आदेश तो केवल पेटीएम को लेकर हैं। मगर सवाल उठता है कि भारत में जिस डिजिटल Payment को लेकर बार बार दावा किया जा रहा था

Payment सिस्टम में आपके पैसे का भविष्य सुरक्षित है या नहीं।

यह सुरक्षित है, उस क्षेत्र की एक बहुत बड़ी कंपनी का यह हाल है, तब हम और आप बिल्कुल नहीं जानते कि इस तरह के पेमेंट सिस्टम में आपके पैसे का भविष्य सुरक्षित है या नहीं। एक बार फिर से जोर देकर कहना चाहता हूं, आप पेटीएम की नहीं, अपने पैसों के भविष्य की चिंता कीजिए। जब पैसा गायब होगा तब डीजे पर डांस करना एक दिन में निकल जाएगा। पेटीएम कोई छोटी मोटी कंपनी नहीं है। यूपीआई के क्षेत्र में यह तीसरी बड़ी कंपनी है।

फोन पर गूगल पे के बाद पेटीएम का ही नंबर आता है।

तब इसका यह हाल है। रिजर्व बैंक के आदेश और नई पुरानी खबरों को पढ़ते हुए लगा कि यह कंपनी नियमों की धज्जियां उड़ाती रही है। अब यह किसके लाभ के लिए किया गया। उपभोक्ताओं का कितना नुकसान हुआ है। शेयर धारकों के कितने हजार करोड़ रुपए डूबे हैं, कोई नहीं जान सकता। जानेंगे तब जब कोई पूछने वाला होगा। जो पढ़े लिखे हैं, वही पूछ सकते हैं। मगर वे अपनी अपनी हाउसिंग सोसाइटी में धर्म का मोर्चा गेट पर खड़े होकर संभालने में लगे हैं। बिजी हैं। उनके पास टाइम नहीं है और मेरे पास बहुत जानकारी नहीं है।

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