जानिये कैसे की जाती है काजू की खेती, कमाई लाखो में।

जानिये कैसे की जाती है काजू की खेती, कमाई लाखो में।

वैसे तो आप लोग जानते ही हैं काजू कितनी महँगी होती है। ऐसे में अगर आप लोग काजू की खेती करते हैं तो अमीर बनना तो स्वभाव की बात है। काजू आजकल हर घरों में पाया जाता है। यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। काजू की खेती भारत में बहुत ही कम किसान भाई करते हैं पर आपको बता दें की काजू की खेती से हुई उत्पादन इसलिए बहुत महंगे दामों में बिकती है। तो आइए आज इस विषय पर हम लोग चर्चा करते हैं कि काजू की खेती कैसे की जाए।

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काजू की खेती कैसे करें?

काजू की खेती सर्वप्रथम ब्राजील में किया गया था। समान तापमान वाली जगहों पर इसकी खेती को करना अच्छा माना जाता है। काजू की खेती को समुद्र तल से 700 मीटर की ऊंचाई पर करना चाहिए। फलों की पैदावार के लिए इसकी फसल को नर्मि या सर्दी से बचाना होता है, क्योंकी नमी और सर्दी की वजह से इसकी पैदावार प्रभावित होती हैं।

काजू की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान क्या है?

काजू की फसल में अधिक बारिश की आवश्यकता होती है। इसके पौधों को अच्छे से विकसित होने के लिए 600-4500 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। आरंभ में इसके पौधों को 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है। इसके बाद जब पौधों में फूल लगने लगते हैं तभी ने सुषम मौसम की आवश्यकता होती है। जगदीश के फल पकने लगते हैं तभी ने 30 से 35 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। तापमान के अधिक होने पर फलों की गुणवत्ता में कमी तथा फलों के टूट जाने का खतरा बढ़ जाता है।

पौधों की रोपाई का तरीका तथा सही समय क्या है?

काजू के पौधों को फेस में लगाने से पहले गड्ढों को 1 महीने पहले ही तैयार कर लिया जाता है। इसके बाद गड्ढों में पौधों को लगाने से पहले गड्ढों में मौजूद खरपतवार को निराई गुड़ाई कर निकाल देना चाहिए। इसके बाद इन गड्ढों में एक छोटा सा गड्ढा बनाकर उसमें पौधों को लगा देना चाहिए फिर उसके बाद उसको चारों तरफ अच्छे से ढक देना चाहिए। काजू के पौधों की रोपाई बारिश के मौसम में करने से ने प्रारंभिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इससे पौधों की वृद्धि अच्छी से होती है तथा पौधे बड़े भी जल्द हो जाते हैं।

काजू की खेती से उत्पादन कितना मिलता है?

काजू के पौधों में रोपाई के 3 साल बाद फल लगना आरंभ होता है तथा फूल के 2 महीने बाद फल पक कर तैयार हो जाते हैं। काजू दिखने में किडनी के आकार का होता है। हेलो के पकने के बाद गिरी के ऊपर लाल पीले रंग के फूल दिखाई देने लगते हैं। काजू की गिरी जहरीली होती है। तकनीकी प्रक्रिया कर इन्हें खाने योग्य बनाया जाता है। सबसे पहले इनके फलों को छांट कर धूप में अच्छे से सूखा लिया जाता है, इनके बाद इन्हें खाने के लिए प्रोसेसिंग कर तैयार किया जाता है।

काजू की खेती में कितना मुनाफा होता है?

काजू की फसल में पैदावार की बात करें तो इसके पौधों के एक बार लग जाने के बाद कई वर्षों तक पैदावार देते हैं। इसके पौधों को लगते समय ज्यादा खर्चा आता है। एक हेक्टेयर के खेत में लगभग 500 पौधों को लगाया जा सकता है। एक पौधे में 20 किलो काजू के हिसाब से 1 हेक्टेयर में लगभग 10 टन की पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

काजू के प्रोसेसिंग में अधिक खर्चा आता है किंतु काजू का बाजारी भाव भी काफी अच्छा होता है। प्रोसेसिंग कर खाने योग का जो कि बजारी भाव ₹700 से लेकर गुणवत्ता के आधार पर इससे भी अधिक होता है। थोक में भी से ₹500 प्रति किलो तक बेच सकते हैं, जिससे किसान इसकी एक फसल में काफी अच्छी कमाई कर अधिक मुनाफा कमा सकता है।

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